Yoga kya hota hai – आज के लोग अपने काम से इतना ज्यादा तनाव और शारीरिक थकावट से परेशान हो चुके है। वैसे स्थिति में आज के लोग अपने शरीर बीमारियों और मन की शांति के लिए योग पद्धति का चयन करते है,जो हमें अच्छे जीवन और अच्छी स्वास्थ को बनाए रखने में मदद करती है।
इस लेख में जानेंगे योग का इतिहास, अष्टांग क्या है?
योग का पूरा इतिहास क्या है?
•Yoga kya hota hai—योग का इतिहास लगभग सिंधु घाटी सभ्यता के आस-पास माना जाता है।
•वेद, उपनिषदों, और भागवत गीता में योग के बारे में पूरा बिस्तर से बताया गया है।
•Yoga kya hota hai- योग का श्रेय महर्षि पतंजलि को जाता है, जिन्होंने योगसूत्र की रचना किी थी।उन्होंने योग को “चित्त की वृत्तियों का निरोध” (Yoga Chitta Vritti Nirodha) कहा है, जिसका मतलब है मन की चंचलता को रोकना।
योग के 8 अष्टांग क्या हैं और इसमें क्या शामिल है?
Yoga kya hota hai – यह जानने के लिए हमें पतंजलि के 8 अष्टांग को पूरी तरह से जानना पड़ेगा।
1. यम (Yama)
यह योग का पहला आधार है।
(का) अहिंसा
•किसी व्यक्ति के बारे में गलत नहीं सोचना।
•किसी व्यक्ति को ऐसा बात नहीं बोलना चाहिए जिससे उसकी आत्मा को ठेस पहुंचे।
•ना किसी को शारीरिक रूप से चोट पहुंचाना और ना ही मानसिक रूप से किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाना चाहिए।
(खा) सत्य
•सत्य का अर्थ—जैसा देखना, महसूस करना और सुनाना—को ही सच कहा जाता है। यदि आपके सच से किसी का अपमान होता है तो उस स्थिति में अपने आप को शांत रखना ही बेहतर होता है।
(ग) अस्तेय
•इसका अर्थ है – चोरी नहीं करना होता है। यदि किसी की वस्तु को उन्हें बताएं बिना आप उनके सामान को अपने पास रख लेते हैं तो उसे ही चोरी कहते हैं।
(घ) ब्रह्मचर्य
•Yoga kya hota hai – ब्रह्मचर्य सिर्फ यौन संयम से लिया जाता है। अपने ब्रह्मचर्य जीवन में किसी व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से कष्ट नहीं पहुंचना होता है। किसी की सेवा में बात करना ही असली ब्रह्मचर्य होती है।
2. नियम (Niyama)
इसका संबंध स्वयं से है, अपने शारीरिक स्वास्थ्य और अनुशासन से करने वाले कार्य।
(का) शौच
•अपने शरीर को स्नान से साफ रखना और घर में गन्दगी को साफ कर करके रखना।
•अपने शरीर के अंदर किसी के प्रति गीना, लालच और नकारात्मक विचारों को सही करना।
(खा) संतोष करना
•इस संतोष का अर्थ – किसी को देख के जलाना नहीं चाहिए क्योंकि जो हमारे पास है उसे ही संतोष करना चाहिए क्योंकि जो हमारे पास है वह किसी के पास नहीं है।
(ग) तप
•तप का सीधा अर्थ है, अनुशासन और निरंतरता से अपने कार्य को करना। यदि अपने लक्ष्य के प्रति लगन से मेहनत करेंगे और आने वाली दुख-पीड़ा को सहन कर लेते हैं, तो आने वाले समय में सब मिल जाएगा।
(घ) स्वाध्याय
•महापुरुषों के बताई हुई बातों को ध्यान में रखकर अपने दिनचर्या का आरम्भ करें।
•अपने खुद के व्यवहार का पहचान करना। हम कौन हैं? और हमारी इस दुनिया में क्या काम है।
3. आसन (Asana)
यह आलस कुछ नहीं होता है, क्योंकि यदि किसी चीज को करने में मन लग जाए, तो उसमें हमें आलस नहीं आता है।
(का) आलस के मुख्य कारण
•बाहर के अनहेल्दी चीजों को ज्यादा मात्रा में सेवन करना ही आलस का कारण है।
•किसी कार्य को करने के कारण से हम अच्छे से सांस नहीं ले पाते हैं, जिससे थकावट होती है।
•जब आपको कोई एक निश्चय दिशा नहीं मिलता है, तो वह आलस का रूप ले लेता है।
(खा) योग के माध्यम से आलस को कैसे दूर करें?
•सुबह सूर्य नमस्कार करने से आलस कुछ हद तक दूर होता है। यह बॉडी के अंदर में ‘रजस’ (ऊर्जा) को सक्रिय करता है और रक्त संचार बढ़ाता है।
•Yoga kya hota hai- कपिलभाति और भस्त्रिका अच्छी प्राणायाम होती है,जो शरीर को ऊर्जावान करती है। यह शरीर की आलस और मानसिक तनाव को कम करता है।
4. प्राणायाम (Pranayama)
इसका तीन मुख्य चरन होता हैं,जो निम्न इस प्रकार है।
(का)अनुलोम-विलोम (Alternate Nostril Breathing)
•यह मानसिक तनाव और मनको संतुलित करने में मदद करता है।
(खा) कपालभाति (Skull Shining Breath)
•यह शरीर से जहरीले पदार्थ कोनिकालना,, चेहरे की चमक कोबढ़ाना और पेट कीफैटट को कम करने में मदद करता है।
(ग) भ्रामरी
•सांस लेते समय हल्की सीआवाज़ज करना। यह मन को जल्द शांत करने में सहायक करती है।
5. प्रत्याहार (Pratyahara)
यह 2 चीजों से बनीहै:। एक विपरीत और दूसरा भोजन जिन्हें हम लोग खातेहैं।।
(का) मानसिक थकान से बचाव
•जब हम किसी कार्य को करने या फिर इंटरनेट पर काफी समय बिताने के बाद हमारी शरीर थक जातीहै,। प्रत्याहार हमे अपने मानसिक शोर से बचाकर मन को शांति करने में मदद करता है।
(खा) इंद्रियों पर नियंत्रण
•हम अपने मन के इतने ज्यादा काबू हो चुके हैं कि हमारा मन हर समय अशांत रहता है। इसमें हमें प्रत्याहार राजा बनाताहै, नन कि उसका गुलाम।
(ग) ध्यान की तैयारी करना
•जब मन बाहर भटकतीहै, तो यह ध्यान meditation))लगाना मुमकिन है। प्रत्याहार हमारी मन को धारणा के लिए तैयार करने में सहायक करती है।
8. समाधि (Samadhi)
पूरी तरह से स्थिर हो जाना और इसका 2 प्रकार होता है।
(का) सम्प्रज्ञात समाधि
•इसमें साधक का किसी विचार या वस्तु पर आलंबन(support)) रहता है। इसमें मन पूरी तरह शांत तो होता है, लेकिन सूक्ष्म चेतना बनी रहती है।
(खा) असम्प्रज्ञात समाधि
•यह सबसे ऊँची अवस्था है। (Yoga kya hota hai) यहाँ कोई विचार या आलंबन शेष नहीं रहता है, केवल शुद्ध चेतना और असीम आनंद बचता है। इसे ही ‘कैवल्य’ या ‘मुक्ति’ का द्वार माना जाता है।
निष्कर्ष
Yoga kya hota hai – यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मन को शांति करने में और तनाव को जड़ से खत्म करता है।
Q1. क्या योग शुरू करने के लिए शरीर का ढीला होना जरूरी है?
जवाब – Yoga kya hota hai?; इसके लिए हमें पहले से लचीला होने की जरूरत नहीं होती है, क्योंकि योग करने के बाद शरीर अपने आप लचीला हो जाता है।
Q 2. योग करने का सबसे सही समय क्या है?
जवा—Yoga kya hota hai; योग करने के लिए सबसे अच्छा समय सुबह होता है, क्योंकि इस समय हमारी पूरी ऊर्जा से भरी रहती है। यदि रात में काम के सिलसिले से सुबह जल्दी नहीं उठ पाए,ए तो आप शाम को भी योग कर सकते हैं।
Q 3. क्या योग से वजन कम किया जा सकता है?
जवाब – बिल्कुल, सूर्य नमस्कार, कपालभाति और गतिशील आसन (जैसे विन्यास योग) कैलोरी जलाने और मेटाबॉलिज्म को सुधारने में बहुत प्रभावी हैं। यह वजन के साथ शरीर को फिट करता है।
Q4. Yoga kya hota hai?
Yoga kya hota hai – यह एक ऐसा व्यायाम है जो मन को शांत करता है। अगर रोजाना योग करेंगे तो शरीर फिट भी हो जाएगा।
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