Push-up workout करने से मसल्स मजबूत होता है और इसका हु मतलब केवल मांसपेशियों का फूलना नहीं होता, बल्कि हड्डियों की मजबूती, स्टैमिना और शरीर की आंतरिक ऊर्जा भी होता है। Push- up workout एक कंपाउंड एक्सरसाइज (compound exercise) है, जिसका सीधा मतलब यह है कि शरीर की सभी मांसपेशियों पर कार्य करना।
मांसपेशियों की ताकत और विकास
Push-up workouts मुख्य रूप से आपके सीने (chest), कंधों (shoulders), और ट्राइसेप्स (triceps) को लक्षित करते हैं। जब आप नीचे जाते हैं और खुद को ऊपर धकेलती हैं, तो आपकी मांसपेशियां अपने ही शरीर के वजन के खिलाफ काम करती हैं। इससे मांसपेशियों के फाइबर टूटते हैं और आराम के दौरान वे पहले से अधिक मजबूत होकर जोड़ता है।
कोर स्टेबिलिटी (Core Stability)
Push-up workouts केवल हाथों का खेल नहीं हैं। एक सही पुश-अप करने के लिए आपको अपने पेट और पीठ की मांसपेशियों को सख्त रखना पड़ता है। इससे आपकी core strength बढ़ती है, जो शरीर के संतुलन और भारी सामान उठाने की क्षमता के लिए बहुत जरूरी है।
हड्डियों की मजबूती (Bone Density)
विज्ञान कहता है कि “वेट बेयरिंग” एक्सरसाइज (जिसमें शरीर का भार उठाना पड़े) हड्डियों के घनत्व को बढ़ाती है। नियमित पुश-अप वर्कआउट करने से कलाई, कोहनी और कंधों की हड्डियां मजबूत होती हैं, जिससे बुढ़ापे में कोई बुरा प्रभाव जैसी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
Push-up workout करने का अन्य फायदा
Push-up workouts केवल शरीर की ताकत ही नहीं बढ़ाते हैं, बल्कि यह पूरे शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी दुरुस्त रखते हैं:
हृदय स्वास्थ्य (Cardiovascular Health):
जब आप एक साथ कई मांसपेशियों का उपयोग करते हैं, तो दिल को खून पंप करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, जिससे आपका हृदय स्वस्थ रहता है।
पोस्चर में सुधार:
अगर आप दिन भर कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं, तो पुश-अप्स आपकी पीठ की मांसपेशियों को सक्रिय कर आपके बैठने और खड़े होने के तरीके (पोस्चर) को ठीक करते हैं।
बिना किसी उपकरण के वर्कआउट:
इसकी सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि इसके लिए आपको महंगे जिम की जरूरत नहीं है। आप इसे कहीं भी, कभी भी कर सकते हैं।
अधिकतम पुश अप शक्ति पाने के लिए सही तरीका क्या है?
गलत तरीके से किए गए पुश-अप वर्कआउट फायदे के बजाय नुकसान देते हैं (जैसे, कंधों में चोट)। अधिकतम शक्ति के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
•हाथों की स्थिति: हाथ कंधों से हल्का बाहर होने चाहिए।
•शरीर की रेखा: सिर से लेकर एड़ी तक शरीर एक सीधी रेखा में होना चाहिए। कूल्हों को बहुत ऊपर या बहुत नीचे न झुकाएं।
•सांस लेने का तरीका: जब नीचे जाएं तो सांस लें, और जब ऊपर की ओर जोर लगाएं तो सांस को छोड़ें।
सच्चाई: क्या सिर्फ पुश-अप वर्कआउट काफी है?
यहां एक महत्वपूर्ण सच्चाई समझना जरूरी है। यदि आप केवल एक ही तरह के पुश-अप वर्कआउट करते रहेंगे, तो शरीर को उसकी आदत हो जाएगी और शक्ति बढ़ना रुक जाएगी (इसे ‘Plateau’ कहते हैं)। शक्ति को लगातार बढ़ाने के लिए आपको प्रोग्रेसिव ओवरलोड अपनाना होगा:
•बदलाव लाएं: जब साधारण पुश-अप्स आसान लगने लगें, तो ‘डायमंड पुश-अप्स’, ‘डिक्लाइन पुश-अप्स’ या ‘आर्चर पुश-अप्स’ ट्राई करें।
• रेप्स बढ़ाए: धीरे-धीरे अपनी संख्या बढ़ाए।
•आहार: शक्ति केवल व्यायाम से नहीं, बल्कि सही प्रोटीन और पोषण से आती है।
निष्कर्ष
भी, यह पूरी तरह सच है कि push-up workout करने से शरीर में जबरदस्त शक्ति बढ़ती है। यह न केवल मांसपेशियों को आकार देता है, बल्कि शरीर की कार्यक्षमता (functional strength) को भी बढ़ाता है। अगर आप आज से ही दिन के 10-20 पुश-अप्स से शुरुआत करते हैं, तो कुछ ही हफ्तों में आप अपने शरीर में ऊर्जा और मजबूती का अनुभव करेंगे।
1. क्या रोजाना पुश-अप्स करना सुरक्षित है?
बिल्कुल,रोजाना वर्कआउट किए जा सकते हैं, लेकिन यह आपकी फिटनेस लेवल पर निर्भर करता है। अगर आप शुरुआती (beginner) हैं, तो मांसपेशियों को रिकवर होने का समय देने के लिए हफ्ते में 3-4 दिन से शुरुआत करना बेहतर है। जैसे-जैसे आपकी शक्ति बढ़े, आप इसे डेली रूटीन में शामिल कर सकते हैं।
2. एक दिन में कितने पुश-अप्स करने चाहिए?
इसकी कोई निश्चित संख्या नहीं है। एक नौसिखिया के लिए 5 से 10 के 3 सेट पर्याप्त हैं। वहीं, जो लोग पहले से वर्कआउट कर रहे हैं, वे अपनी क्षमता अनुसार 50 से 100 पुश-अप्स कर सकते हैं। महत्वपूर्ण संख्या नहीं, बल्कि आपका फॉर्म (सही तरीका) है।
3. क्या पुश-अप्स करने से पेट की चर्बी (bellyfat) कम होती है?
Push up workout मुख्य रूप से मांसपेशियों के निर्माण और ताकत बढ़ने के लिए हैं। हालांकि, यह कैलोरी जलाता है और आपके कोर (core) को मजबूत करता है, लेकिन केवल पुश-अप्स से पेट की चर्बी कम नहीं होती। इसके लिए आपको कार्डियो और सही डाइट पर भी ध्यान देना होगा।
4. अगर मैं एक भी पुश-अप नहीं कर पा रहा हूं, तो क्या करूं??
घबराएं नहीं, यह सामान्य है। आप Incline Push-ups (हाथों को किसी ऊंची बेंच या टेबल पर रखकर)या Knee Push-up(घुटनों को जमीन पर रखकर)) से शुरुआत कर सकते हैं। धीरे-धीरे आपकी ताकत बढ़ेगी और आप स्टैंडर्ड पुश-अप कर पाएंगे।
5. पुश-अप्स करने का सबसे अच्छा समय क्या है?
आप इसे सुबह खाली पेट या शाम के वर्कआउट के समय कर सकते हैं। सुबह करने से मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और शरीर दिन भर एक्टिव रहता है। बस ध्यान रहे कि भारी भोजन के तुरंत बाद इसे न करें।
6.क्या पुश-अप्स से सीने(chest)) का आकार बढ़ता है?
हा, पुश-अप्स’पेक्टोरल मांसपेशियों’) पर काम करते हैं।। अलग-अलग वेरिएशन जैसे वाइड-ग्रिप या डिक्लाइन पुश-अप्स करने से सीने के ऊपरी और निचले हिस्से को अच्छी शेप मिलती है।
7. क्या पुश-अप्स के दौरान सांस रोकना सही है?
बिल्कुल नहीं। व्यायाम के दौरान सांस रोकना ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है। सही तरीका यह है कि जब आप नीचे जाएं तो सांस लें(inhale)) और जब शरीर को ऊपर उठाएं तो सांस छोड़ें(exhale)
8.क्यापुश-अप वर्कआउट करने से ऊंचाई (height)) रुक जाती है?
नहीं, यह एक बहुत बड़ा भ्रम है। पुश-अप्स एक बॉडी वेट एक्सरसाइज है और इसका हड्डियों के विकास या हाइट रुकने से कोई संबंधनहीं है।बल्कि,,यह किशोरावस्था (teenage)) में मांसपेशियों के विकास और बेहतर पोस्चर में मदद करता है।
9. क्या पुश-अप्स और जिम में बेंच प्रेस (Bench Press) एक बराबर हैं?
वैज्ञानिक रूप से, पुश-अप्स में आप अपने शरीर के वजन का लगभग 65\% से 75\% हिस्सा उठाते हैं। बेंच प्रेस में आप अपनी क्षमता अनुसार वजन बढ़ा सकते हैं। हालांकि, पुश-अप्स शरीर के प्राकृतिक संतुलन और “कोर” के लिए बेंच प्रेस से बेहतर माने जाते हैं।
10. पुश-अप्स करते समय कलाई में दर्द क्यों होता है?
इसका कारण अक्सर गलत फॉर्म या कलाई का लचीला न होना होता है। अगर दर्द हो, तो अपनी हथेलियों को थोड़ा बाहर की ओर घुमाएं।।ऐसा push- up workout का उपयोग करें। यह आपकी कलाई पर पड़ने वाले सीधे दबाव को कम करता
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